हमारा इतिहास

अपनी अविचल साधना के स्वर्णिमोत्तम ‘न भूतो न भविष्यति’ ऐसे स्वर्णिम संयमोत्सव वर्ष 2018 में भारत वर्ष के सबसे गौरवशाली तथा बुन्देलखण्ड की पावन पुनीत अतिशय धरा पपौराजी को कृतकृत्य करने अपने अदम्य साहस को साकार रूप देने उन्होंने श्रुत पंचमी 18 जून 2018 को अपनी अतुलनीय ऐसी स्वीकृति स्वरूप आशीर्वाद की किरणें प्रदान कर आने वाले हजारों वर्षों तक के लिए गुरुकुल परंपरा को शाश्वत चिरस्मरणीय बना दिया है।

प्रथम 108 चेतन कृतियों को तराशकर उन्हें मांगलिक कलश का रूप प्रदान करने का शुभारंभ उनके प्रथम अतिशयकारी सन्निधि एवं सानिध्य में हुआ। यह शुभारंभ न होकर स्वर्णिम राष्ट्र की गुरूजी के अन्तरंग में पनपती हुई राष्ट्र की तस्वीर का रेखाटन हुआ है।

पपौराजी प्रतिभास्थली गुरुकुल में वर्तमान में कक्षा 4 से कक्षा 8 वीं तक 250 से अधिक छात्राएं अध्ययनरत हैं। यह पंचम प्रतिभास्थली क्रमशः जबलपुर(2006), डोंगरगढ़ (2012), रामटेक (2014), इंदौर(2018) की उज्जवल परम्परा को साथ लेकर उसमें और नया रंग भरने ,स्वर्णिम क्रांति के लिए आचार्य भगवान के परम आशीर्वाद के साथ तैयार है।